अगर न होवे रग-ए-ख़्वाब सर्फ़-ए-शीराज़ा
तमाम दफ़्तर-ए-रब्त-ए-मिज़ाज बरहम है
“If the dream's delicate thread is not for binding spent,The whole account of temperament's concord is rent.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अगर सपनों का नाज़ुक धागा बांधने और व्यवस्थित करने में खर्च न हो, तो स्वभाव की सारी व्यवस्था और सामंजस्य बिगड़ जाता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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