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मैं और हज़्ज़-ए-वस्ल ख़ुदा-साज़ बात है
जाँ नज़्र देनी भूल गया इज़्तिराब में

I, and the joy of union—a matter divinely wrought! In my intense agitation, my life's offering I forgot.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

कवि मिलन के आनंद को ईश्वर-निर्मित अद्भुत बात मानता है। इस तीव्र उत्तेजना में, वह अपनी जान भेंट करना भूल गया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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