है तेवरी चढ़ी हुई अंदर नक़ाब के
है इक शिकन पड़ी हुई तरफ़-ए-नक़ाब में
“Her brow is furrowed, 'neath the covering veil,A wrinkle lies across the veil's soft trail.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
नक़ाब के अंदर उसकी तेवरी चढ़ी हुई है। नक़ाब की तरफ़ एक शिकन पड़ी हुई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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