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मैं मुज़्तरिब हूँ वस्ल में ख़ौफ़-ए-रक़ीब से
डाला है तुम को वहम ने किस पेच-ओ-ताब में

I am restless even in our union, fearing the rival's gaze;Into what anguish has mere suspicion cast your days?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं अपने मिलन में भी प्रतिद्वंद्वी के डर से बेचैन हूँ। तुम्हें इस वहम ने किस बड़ी परेशानी में डाल दिया है?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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