जो मुनकिर-ए-वफ़ा हो फ़रेब उस पे क्या चले
क्यूँ बद-गुमाँ हूँ दोस्त से दुश्मन के बाब में
“What deceit can work on one who denies all loyalty?Why should I be suspicious of my friend regarding the enemy?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जो वफ़ा को नहीं मानता, उस पर क्या फ़रेब काम करेगा? दुश्मन के मामले में मैं अपने दोस्त पर क्यों शक़ करूँ?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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