रौ में है रख़्श-ए-उम्र कहाँ देखिए थमे ने हाथ बाग पर है न पा है रिकाब में

“The steed of life is in full gallop, who knows where it will stay; no hand holds fast upon the reins, nor rests the foot in the stirrup's way.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ज़िंदगी का घोड़ा तेज़ रफ़्तार से दौड़े जा रहा है, न जाने कहाँ जाकर रुकेगा; न तो हाथ में लगाम है और न ही पाँव रकाब में है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ ज़िंदगी की बेबसी को बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां करते हैं, जहाँ वे उम्र को एक तेज़ रफ़्तार बेकाबू घोड़े की तरह देखते हैं। सबसे मार्मिक बात यह है कि इस सफ़र में इंसान का अपनी ज़िंदगी पर कोई इख़्तियार नहीं है—न तो उसके हाथ में लगाम है और न पाँव रकाब में टिके हैं। हम सब वक़्त के इस तेज़ बहाव में बस बहे चले जा रहे हैं, बिना यह जाने कि यह दास्तान कब और कहाँ जाकर थमेगी।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.