पूछा था गरचे यार ने अहवाल-ए-दिल मगर
किस को दिमाग़-ए-मिन्नत-ए-गुफ़्त-ओ-शुनूद था
“Though my beloved inquired about the heart's condition,Who had the mind for the burden of speaking and hearing?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
भले ही प्रिय ने मेरे दिल का हाल पूछा था, पर बातचीत करने और सुनने की ज़हमत उठाने का किसे दिमाग़ था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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