गर्दिश-मुहीत-ए-ज़ुल्म रहा जिस क़दर फ़लक
मैं पाएमाल-ए-ग़म्ज़ा-ए-चश्म-ए-कबूद था
“However much the heavens' cruel orbit swayed,By blue-eyed glances, I was trampled, laid.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आकाश का क्रूर चक्र जितना भी चला, मैं नीली आँखों की अदाओं से कुचला हुआ था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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