ग़ज़ल

जब ब-तक़रीब-ए-सफ़र यार ने महमिल बाँधा

جب بَتقریبِ سفر یار نے محمل باندھا
मिर्ज़ा ग़ालिब· Ghazal· 12 shers· radif: बाँधा

यह ग़ालिब की ग़ज़ल प्रिय के आसन्न प्रस्थान के गहरे प्रभाव को चित्रित करती है। इसमें दर्शाया गया है कि कैसे एक यात्रा की मात्र तैयारी हृदय में एक तीव्र, सर्वव्यापी लालसा को प्रज्वलित करती है, जिससे आशा और निराशा का एक युद्धक्षेत्र बन जाता है। ग़ालिब अंततः यह निष्कर्ष निकालते हैं कि वासना की प्यास असीम रहती है, जो सभी नियंत्रण के प्रयासों से परे है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
जब ब-तक़रीब-ए-सफ़र यार ने महमिल बाँधा तपिश-ए-शौक़ ने हर ज़र्रे पे इक दिल बाँधा
जब प्रियतम ने सफ़र के लिए महमिल बाँधा, तब उत्कट इच्छा की तपिश ने हर ज़र्रे पर एक दिल बाँध दिया।
2
अहल-ए-बीनश ने ब-हैरत-कदा-ए-शोख़ी-ए-नाज़ जौहर-ए-आइना को तूती-ए-बिस्मिल बाँधा
सूझबूझ रखने वाले लोगों ने नाज़ की चंचलता के आश्चर्यचकित कर देने वाले घर में, आईने के जौहर को एक ज़बह किए हुए तोते की तरह बाँध दिया। यह उपमा दर्शाती है कि गहन सौंदर्य और आकर्षण आईने की स्वाभाविक प्रतिबिंबित करने की क्षमता को भी खामोश या वश में कर सकता है।
3
यास ओ उम्मीद ने यक-अरबदा मैदाँ माँगा इज्ज़-ए-हिम्मत ने तिलिस्म-ए-दिल-ए-साइल बाँधा
निराशा और आशा ने अपने अकेले संघर्ष के लिए एक मैदान माँगा। हिम्मत की कमजोरी ने याचक के हृदय पर एक जादू कर दिया।
4
न बंधे तिश्नगी-ए-ज़ौक़ के मज़मूँ 'ग़ालिब' गरचे दिल खोल के दरिया को भी साहिल बाँधा
ऐ ग़ालिब, ज़ौक़ (इच्छा) की प्यास के विषय बंधे नहीं, हालाँकि खुले दिल से दरिया को भी किनारा (सीमा) बाँध दिया गया था।
5
इस्तिलाहात-ए-असीरान-ए-तग़ाफ़ुल मत पूछ जो गिरह आप न खोली उसे मुश्किल बाँधा
उन लोगों की शब्दावली या हालात के बारे में मत पूछो जो अपनी लापरवाही के गुलाम हैं। जिस गाँठ को वे खुद न खोल सके, उसे उन्होंने और भी कसकर बाँध दिया, जिससे वह और मुश्किल हो गई।
6
यार ने तिश्नगी-ए-शौक़ के मज़मूँ चाहे हम ने दिल खोल के दरिया को भी साहिल बाँधा
प्रिय ने शौक़ की तिश्नगी के मज़मूँ चाहे और हमने दिल खोलकर दरिया को भी साहिल बाँध दिया।
7
तपिश-आईना परवाज़-ए-तमन्ना लाई नामा-ए-शौक़ ब-हाल-ए-दिल-ए-बिस्मिल बाँधा
दर्पण की तपिश तमन्ना की उड़ान लाई। मैंने चाहत का ख़त एक बेचैन दिल से बाँधा।
8
दीदा ता-दिल है यक-आईना चराग़ाँ किस ने ख़ल्वत-ए-नाज़ पे पैराया-ए-महफ़िल बाँधा
किसने नाज़ की ख़ल्वत को महफ़िल की शानो-शौकत से सजाया है? आँख से दिल तक, यह एक ही आईना है जो रोशनी से जगमगा रहा है।
9
ना-उमीदी ने ब-तक़रीब-ए-मज़ामीन-ए-ख़ुमार कूच-ए-मौज को ख़म्याज़ा-ए-साहिल बाँधा
निराशा ने, ख़ुमार के विषयों के बहाने, लहर के मार्ग को किनारे की जम्हाई से बांध दिया।
10
मुतरिब-ए-दिल ने मिरे तार-ए-नफ़स से 'ग़ालिब' साज़ पर रिश्ता पए नग़्मा-ए-'बेदिल' बाँधा
ग़ालिब, मेरे दिल के गायक ने मेरी साँस के तारों से साज़ पर बेदिल के नग़्मे के लिए रिश्ता बाँधा।
11
ना-तवानी है तमाशाई-ए-उम्र-ए-रफ़्ता रंग ने आइना आँखों के मुक़ाबिल बाँधा
दुर्बलता बीते हुए जीवन की दर्शक बन जाती है। ऐसा लगता है मानो 'रंग' ने ही आँखों के सामने आईना रख दिया हो।
12
नोक-ए-हर-ख़ार से था बस-कि सर-ए-दुज़दी-ए-ज़ख़्म चूँ नमद हम ने कफ़-ए-पा पे 'असद' दिल बाँधा
हर काँटे की नोक ज़ख़्म देने के लिए इतनी तैयार थी कि ऐ असद, हमने अपने दिल को नमद की तरह अपने पैर के तलवे पर बाँध लिया।
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