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है मुझे अब्र-ए-बहारी का बरस कर खुलना
रोते रोते ग़म-ए-फ़ुर्क़त में फ़ना हो जाना

I long to pour forth like a spring cloud, and then be clear,Weeping, weeping, to perish in the sorrow of separation.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरी इच्छा है कि मैं बसंत के बादल की तरह बरस कर खुल जाऊँ। जुदाई के दुख में लगातार रोते हुए समाप्त हो जाऊँ।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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