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निगह-ए-गर्म से एक आग टपकती है 'असद'
है चराग़ाँ ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-गुलिस्ताँ मुझ से

From a fervent gaze, a fire descends, Asad, The garden's dry refuse, by me, becomes a lamp-lit spread.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरी गर्म निगाह से एक आग टपकती है, असद। मेरे द्वारा बाग़ का सूखा तिनका और कचरा भी रोशनी से जगमगा उठता है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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