ख़्वाब-ए-जमइय्यत-ए-मख़मल है परेशाँ मुझ से
रग-ए-बिस्तर को मिली शोख़ी-ए-मिज़्गाँ मुझ से
“The dream of velvet's comfort is scattered by me,The bed's very fibers gained my lashes' sharp agility.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरी बेचैनी ने मख़मल के आराम और सुकून को भी बिखेर दिया है। मेरी पलकों की शोख़ी से बिस्तर की रगों को भी चुभन और बेचैनी मिल गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
