ग़ज़ल

ग़म खाने में बूदा दिल-ए-नाकाम बहुत है

غم کھانے میں بوسیدہ دلِ ناکام بہت ہے
मिर्ज़ा ग़ालिब· Ghazal· 9 shers· radif: है

यह ग़ज़ल एक ऐसे दिल का चित्रण करती है जो अंतहीन दुख सहते-सहते थक गया है, और जीवन में खुशियों की कमी पर अफ़सोस जताती है। कवि पिंजरे के एकांत में एक विरोधाभासी शांति पाता है, जहाँ वह बाहरी दुनिया के खतरों से मुक्त महसूस करता है। यह ग़ज़ल उन धार्मिक प्रथाओं की भी आलोचना करती है जो केवल कर्मों के फल की लालसा पर आधारित होती हैं।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
ग़म खाने में बूदा दिल-ए-नाकाम बहुत है ये रंज कि कम है मय-ए-गुलफ़ाम बहुत है
ग़म सहते-सहते मेरा नाकाम दिल बहुत कमज़ोर हो गया है। यह अफ़सोस है कि गुलाबी शराब बहुत कम है।
2
कहते हुए साक़ी से हया आती है वर्ना है यूँ कि मुझे दुर्द-ए-तह-ए-जाम बहुत है
मुझे साक़ी से यह कहते हुए शर्म आती है, वरना सच यह है कि मेरे प्याले में बहुत ज़्यादा तलछट बची है।
3
ने तीर कमाँ में है न सय्याद कमीं में गोशे में क़फ़स के मुझे आराम बहुत है
न तो तीर कमान में है और न ही शिकारी घात लगाए बैठा है। पिंजरे के कोने में मुझे बहुत आराम है।
4
क्या ज़ोहद को मानूँ कि न हो गरचे रियाई पादाश-ए-अमल की तमा-ए-ख़ाम बहुत है
मैं तपस्या को क्यों मानूँ, भले ही उसमें दिखावा न हो। क्योंकि कर्मों के फल की कच्ची इच्छा बहुत अधिक है।
5
हैं अहल-ए-ख़िरद किस रविश-ए-ख़ास पे नाज़ाँ पाबस्तगी-ए-रस्म-ओ-राह-ए-आम बहुत है
बुद्धिमान लोग किस विशेष मार्ग पर गर्व करते हैं, जबकि सामान्य रीति-रिवाजों और रास्तों से बहुत अधिक बँधे हुए हैं।
6
ज़मज़म ही पे छोड़ो मुझे क्या तौफ़-ए-हरम से आलूदा-ब-मय जामा-ए-एहराम बहुत है
मुझे ज़मज़म के पास ही छोड़ दो; काबा की परिक्रमा करने से क्या फ़ायदा? मेरा एहराम का वस्त्र शराब से बहुत ज़्यादा सना हुआ है।
7
है क़हर गर अब भी न बने बात कि उन को इंकार नहीं और मुझे इबराम बहुत है
यह अत्याचार होगा यदि अब भी बात न बने, क्योंकि उन्हें इंकार नहीं है और मुझे बहुत आग्रह है।
8
ख़ूँ हो के जिगर आँख से टपका नहीं ऐ मर्ग रहने दे मुझे याँ कि अभी काम बहुत है
मेरा जिगर (दिल) अभी खून बनकर आँखों से टपका नहीं है, ऐ मौत। मुझे यहाँ रहने दे क्योंकि अभी बहुत काम बाकी है।
9
होगा कोई ऐसा भी कि 'ग़ालिब' को न जाने शाइ'र तो वो अच्छा है प बदनाम बहुत है
क्या कोई ऐसा भी होगा जो 'ग़ालिब' को न जानता हो? वह शायर तो अच्छा है पर बदनाम बहुत है।
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