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बद-गुमाँ होता है वो काफ़िर न होता काश के
इस क़दर ज़ौक़-ए-नवा-ए-मुर्ग़-ए-बुस्तानी मुझे

Oh, if only that 'kaafir' would not grow so suspicious, I yearn,For such a deep love for the garden bird's sweet song, in my heart does burn.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

काश कि वह 'काफ़िर' (महबूब) बदगुमान न होता। मुझे बाग़ के परिंदे के गीत का इस क़दर गहरा शौक है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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