वाए वाँ भी शोर-ए-महशर ने न दम लेने दिया
ले गया था गोर में ज़ौक़-ए-तन-आसानी मुझे
“Alas, even there, the Doomsday's clamour allowed no rest,Though for ease of body, I sought the grave's quiet breast.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अफ़सोस, वहाँ भी क़यामत के शोर ने मुझे आराम नहीं करने दिया। मैं तो शरीर को आराम देने की इच्छा से क़ब्र में गया था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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