मेरे ग़म-ख़ाने की क़िस्मत जब रक़म होने लगी
लिख दिया मिन-जुमला-ए-असबाब-ए-वीरानी मुझे
“When the fate of my house of sorrow began to be writ,Among causes of desolation, I was etched in it.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जब मेरे दुःख के घर का भाग्य लिखा जाने लगा, तो मुझे वीरानी (बर्बादी) के कारणों में से एक के रूप में लिख दिया गया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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