“Beauty reveals itself as love's courage allows,Else, the state of a house of mirrors is known.”
सौंदर्य का प्रकटीकरण प्रेम के हौसले के अनुसार ही होता है, अन्यथा शीशे के घर का हाल (कि वह केवल दिखाता है, कुछ रखता नहीं) तो मालूम ही है।
ब-क़द्र-ए-हौसला-ए-इश्क़ जल्वा-रेज़ी है, वगर्ना ख़ाना-ए-आईना की फ़ज़ा मा'लूम। प्यार की हिम्मत के हिसाब से ही खूबसूरती बिखरती है, वरना आईनों के घर की असलियत तो सबको पता है कि वो खाली है। ब-क़द्र का मतलब है के अनुसार या हिसाब से, और जल्वा-रेज़ी का अर्थ है सुंदरता या चमक का फैलना। मेरे दोस्त, ज़रा इस बात की गहराई को समझो। ग़ालिब कह रहे हैं कि ये दुनिया एक शीशमहल की तरह है। एक खाली शीशमहल में तब तक कोई रंग नहीं होता जब तक वहाँ कोई रोशनी न जाए। वो रोशनी हमारे अंदर का प्यार और हमारा हौसला है। हम दुनिया में उतनी ही खूबसूरती देख पाते हैं जितनी हमारे अंदर देखने की हिम्मत होती है। अगर हमारे दिल में उमंग नहीं है, तो ये दुनिया एक ठंडे और खाली आईने के सिवाय कुछ भी नहीं। ये हमारी अपनी रूह की चमक है जो बाहर की चीज़ों को हसीन बनाती है। जैसे एक उदास इंसान को बहार के मौसम में भी फूल मुरझाए हुए लगते हैं, जबकि एक खुशमिज़ाज इंसान को रेगिस्तान में भी सुकून मिल जाता है। सब कुछ हमारे नज़रिए का खेल है। ये दुनिया उतनी ही खूबसूरत है जितनी आपकी अपनी रूह।
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