बहार दर-गिरौ-ए-ग़ुंचा शहर-ए-जौलाँ है — मिर्ज़ा ग़ालिब
“Spring's vast expanse is held captive by the bud's embrace;The magic of coquetry, but the garment's tight-bound space.”
अर्थ
बहार कली के पास गिरवी है, जो एक विचरण का शहर है। नाज़ का तिलिस्म लिबास की तंगी के सिवा कुछ और नहीं जाना जाता।
विस्तार
बहार दर-गिरौ-ए-ग़ुंचा शहर-ए-जौलाँ है । तिलिस्म-ए-नाज़ ब-जुज़ तंगी-ए-क़बा मा'लूम इसका सरल अर्थ यह है कि वसंत की सारी रौनक एक नन्हीं सी कली के भीतर कैद है, मानो वह कली उसके टहलने का कोई बड़ा शहर हो। और सुंदरता का जादुई रहस्य तभी पता चलता है जब वस्त्र शरीर पर तंग या कसे हुए हों। यहाँ गिरौ शब्द का अर्थ है गिरवी या कैद होना, जौलाँ का मतलब है घूमना-फिरना, तिलिस्म का अर्थ है जादुई रहस्य और क़बा का मतलब एक लंबा पहनावा या चोगा है। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ हमें उस असीम संभावना के बारे में समझा रहे हैं जो एक छोटी सी सीमा में बंधी होती है। सोचिए, एक बंद कली को देखकर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता कि उसमें कितनी सुगंध और रंग छिपे हैं। ग़ालिब कहते हैं कि पूरी बहार उस छोटी सी कोठरी में बंद है और आज़ाद होने का इंतज़ार कर रही है। इसी तरह, वे कहते हैं कि सौंदर्य का असली प्रभाव तब पड़ता है जब वह किसी मर्यादा या सीमा में सिमटा हो। जैसे तंग कपड़ों से शरीर की बनावट और उसकी गरिमा उभर कर आती है, वैसे ही रुकावटें ही विस्तार की असली कीमत बताती हैं। यह उस पल की तरह है जब बिजली कड़कने से ठीक पहले आसमान में एक भारी शांति छाई होती है। इसे एक मुड़े हुए नक्शे की तरह समझिए जिसे खोलते ही पूरी दुनिया सामने आ जाती है, या एक बीज की तरह जिसमें पूरा जंगल छिपा होता है। महानता अक्सर तंग गलियों और छोटी जगहों से ही निकलकर पूरी दुनिया पर छा जाती है।
कठिन शब्द
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