“From the wild frenzy of a passion's tumultuous roar, I read disgrace in tears spilled on the desert's floor.”
मैं उस जुनून की वहशत देखता हूँ जो शोर मचाने को तैयार है, और रुस्वाई का शगुन उन आँसुओं से देखता हूँ जो रेगिस्तान में बहा दिए गए हैं।
देखता हूँ वहशत-ए-शौक़-ए-ख़रोश-आमादा से, फ़ाल-ए-रुस्वाई सरिश्क-ए-सर-ब-सहरा-दादा से - Dekhta hun vahshat-e-shauq-e-kharosh-aamada se, Faal-e-ruswai sarishk-e-sar-ba-sahra-dada se. मैं अपने उस जुनून और शौक को देख रहा हूँ जो अब शोर मचाने के लिए तैयार है और मैं अपनी बदनामी का इशारा उन आँसुओं में देख रहा हूँ जो रेगिस्तान की ओर चल पड़े हैं। शब्द वहशत का अर्थ है पागलपन या बेचैनी, खरोश-आमादा का मतलब है शोर मचाने या फूट पड़ने के लिए तैयार होना और सरिश्क का मतलब आँसू होता है। मेरे दोस्त इसे ऐसे समझें कि जब दिल के अंदर का तूफ़ान इतना बढ़ जाए कि वह काबू में न रहे। ग़ालिब यहाँ कह रहे हैं कि उनका जो शौक था वह अब एक ऐसी वहशत यानी पागलपन में बदल गया है जो बस अब फूटने ही वाला है। वह देख रहे हैं कि उनके आँसू अब पलकों पर नहीं रुक रहे बल्कि वे तो रेगिस्तान की तरफ भाग रहे हैं। यह एक किस्म का शगुन है जो बता रहा है कि अब दुनिया में उनकी रुस्वाई यानी बदनामी होने वाली है। जब आँसू घर की चारदीवारी छोड़ देते हैं तो वे इंसान के सारे राज़ ज़माने को बता देते हैं। ग़ालिब अपनी आँखों से निकलते हुए उन आँसुओं में अपनी बदनामी की तस्वीर देख रहे हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे कि आँखों की नमी जब बहकर गालों पर आ जाए तो चाहकर भी आप अपना दुख दुनिया से छिपा नहीं सकते। जब दर्द आँखों से छलक कर रास्तों पर निकल आए तो वह सबकी ज़ुबान बन जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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