“Whose intoxicating glance makes the wine-feast a wilderness, a mad domain? The fairy's pulse, within the glass, by wine's wave concealed, remains.”
शराब की महफिल किसकी मदहोश आँख का वहशत-कदा (भयभीत करने वाला स्थान) है? शराब की लहरों से शीशे में एक परी की नब्ज़ (धड़कन) छिपी हुई है।
बज़्म-ए-मय वहशत-कदा है किस की चश्म-ए-मस्त का / शीशे में नब्ज़-ए-परी पिन्हाँ है मौज-ए-बादा से बज़्म-ए-मय वहशत-कदा है किस की चश्म-ए-मस्त का, शीशे में नब्ज़-ए-परी पिन्हाँ है मौज-ए-बादा से। शराब की यह महफ़िल किसकी नशीली आँखों की वजह से दीवानगी का घर बन गई है? शराब की लहरों में एक परी की धड़कन या नब्ज़ छिपी हुई है। यहाँ वहशत-कदा का मतलब है पागलपन या वीरानी की जगह, और पिन्हाँ का मतलब है छिपा हुआ। मेरे दोस्त, ग़ालिब कह रहे हैं कि इस महफ़िल में जो एक अजीब सा पागलपन छाया है, वह किसी की मदहोश आँखों का जादू है। वह पूछ रहे हैं कि वह कौन है जिसकी आँखों के नशे ने इस पूरी सभा को एक जंगल जैसी बेचैनी और जुनून से भर दिया है? वह शराब के गिलास में उठती लहरों को देख रहे हैं और उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उस शराब के अंदर किसी परी की नब्ज़ धड़क रही हो। यानी महबूब की खूबसूरती ने बेجان शराब में भी जान डाल दी है। यह वैसा ही है जैसे आप किसी की याद में इतने खोए हों कि आपको चाय से उठती भाप में भी कोई नाचता हुआ अक्स नज़र आने लगे। यह इस विचार को दर्शाता है कि प्रेम की दृष्टि से देखने पर दुनिया की हर चीज़ में एक रूहानी धड़कन महसूस होने लगती है। दुनिया सिर्फ वह नहीं जो दिखती है, बल्कि वह है जो रूह महसूस करती है।
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