“Hide but a snare in grass, a peacock bright it grows, By spring's fantastic charm, from desert's wide-spread shows.”
अगर आप दाम (धन/मूल्य) को हरियाली में छिपाते हैं, तो वह मोर बन जाता है, वसंत के जादू का जोश रेगिस्तान द्वारा दी गई विशालता से आता है।
जो़श-ए-नैरंग-ए-बहार अर्ज़-ए-सहरा-दादा से, दाम गर सब्ज़े में पिन्हाँ कीजिए ताऊस हो। रेगिस्तान की इस ज़मीन पर वसंत के जादू का ऐसा जोश है कि अगर हरियाली में कोई जाल छिपाया जाए, तो वह मोर जैसा दिखने लगता है। नैरंग शब्द का अर्थ है जादू या रंगों का बदलाव, पिन्हाँ का मतलब है छिपा हुआ और ताऊस का अर्थ है मोर। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ उस खूबसूरती की बात कर रहे हैं जो नज़रिया बदल देती है। सोचिए कि एक सूखा रेगिस्तान अचानक खिल उठा है। हरियाली इतनी घनी और जादुई है कि अगर शिकारी वहाँ अपना जाल बिछाए, तो उस जाल के घेरे मोर के पंखों पर बनी आँखों जैसे लगने लगेंगे। यह उस पल की बात है जब ज़िंदगी इतनी भरपूर और रंगीन होती है कि उसमें कोई बंधन या मुसीबत नज़र नहीं आती, बल्कि वह भी इसी खूबसूरती का हिस्सा बन जाती है। जैसे बारिश की बूंदों में बिजली के तारों पर बैठी चिड़िया भी किसी संगीत की धुन जैसी लगने लगती है। जब मन में वसंत का जोश हो, तो पाबंदियां भी मोर के पंखों सी सुंदर लगने लगती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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