“The coming of a flood, a tempest of water's sound is here,Lest footprints on the path should hold a finger to their ear.”
यह पानी की आवाज़ के तूफानी सैलाब का आगमन है; पैरों के निशान जो रास्ते से अपने कान में उँगली रखते हैं।
आमद-ए-सैलाब-ए-तूफ़ान-ए-सदा-ए-आब है, नक़्श-ए-पा जो कान में रखता है उँगली जादा से। Aamad-e-sailab-e-toofan-e-sada-e-aab hai, Naqsh-e-pa jo kaan mein rakhta hai ungli jada se. इसका अर्थ है कि पानी की आवाज़ का एक तूफ़ानी सैलाब आ रहा है। इसीलिए रास्ते पर बने पैरों के निशान ने अपने कान में उँगली डाल ली है। शब्द आमद का मतलब है आना, सैलाब का अर्थ है बाढ़, और जादा का अर्थ है रास्ता। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ एक बहुत ही अनोखी बात कह रहे हैं। ज़रा सोचिए, जब हम चलते हैं तो पीछे पदचिह्न छोड़ जाते हैं। हम मानते हैं कि वे निशान खामोश हैं। लेकिन ग़ालिब कहते हैं कि आने वाली ज़िंदगी का शोर इतना भयानक है कि वे खामोश निशान भी डर कर अपने कान बंद कर रहे हैं। यह उस घबराहट की तस्वीर है जो हम तब महसूस करते हैं जब हमें पता होता है कि कोई बड़ी मुसीबत या बदलाव आने वाला है। ग़ालिब हमें बता रहे हैं कि दुनिया की हलचल इतनी तेज़ है कि वह हमारे अतीत और हमारे वजूद के हर हिस्से को बेचैन कर देती है। यह वैसा ही है जैसे किसी पुराने खाली घर में सन्नाटा इतना गहरा हो जाए कि आपको अपनी ही धड़कनें शोर की तरह सुनाई देने लगें और आप कान बंद कर लें। ज़िंदगी का शोर कभी-कभी इतना बढ़ जाता है कि हमारे खामोश निशान भी गूँजने लगते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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