वहम आते हैं देखिए क्या हो — दाग़ देहलवी
“Dark forebodings stir within, let us see what comes to pass; all alone, he has stepped out from the house.”
अर्थ
मन में कई तरह की आशंकाएं और वहम आ रहे हैं कि न जाने क्या होगा, क्योंकि वह घर से बिल्कुल अकेला निकला है।
विस्तार
यह शेर उस अनजाने खौफ और बेचैनी को छूता है जो किसी अपने की फिक्र में दिल को घेर लेती है। मकान की चारदीवारी से निकलकर किसी का अकेले बाहर जाना एक बेहद नाज़ुक मंज़र पेश करता है, जहां बाहर की बेरहम दुनिया का डर सताने लगता है। शायर ने बड़ी सादगी से उस घबराहट को बयां किया है जब कोई तन्हा मुसाफिर अनजान राह पर निकलता है और दिल अनहोनी की आशंका से कांप उठता है।
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