दिल में रहने न दूँ तिरा शिकवा — दाग़ देहलवी
“I will not let a grievance against you linger in my heart; no sooner does it enter the heart than it slips from my tongue.”
अर्थ
मैं तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई शिकवा अपने दिल में नहीं रहने दूँगा; जैसे ही वह दिल में आता है, तुरंत ज़बान से निकल जाता है।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत की उस मासूमियत और बेतकल्लुफ़ी को बयां करता है, जहाँ महबूब से कोई पर्दा नहीं होता। शायर अपने दिल में कोई मैल या शिकवा दबाकर नहीं रखना चाहता; जैसे ही कोई दर्द या शिकायत दिल में आती है, वह फौरन लफ़्ज़ों में ढलकर बाहर आ जाती है। इसमें दिल की मुकम्मल पाकीज़गी और सच्चा जज़्बा झलकता है, जहाँ खामोश कड़वाहट पालने के बजाय साफ़-साफ़ कह देना ही इश्क़ का दस्तूर है।
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