शर्म समझे तिरे तग़ाफ़ुल को — दाग़ देहलवी
शर्म समझे तिरे तग़ाफ़ुल को
वाह क्या होशियार हम भी हैं
“We took your cold indifference for modest shame; ah, what clever fools we are indeed!”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
हमने तुम्हारी बेरुखी को तुम्हारी झिझक या हया समझ लिया; वाह, हम भी खुद को कितने समझदार समझते हैं।
विस्तार
इस शेर में आशिक़ का अपनी ही सादगी और नादानी पर तंज़ झलकता है। महबूब की साफ़ बेरुख़ी और उपेक्षा को उसने यह मानकर दिल को बहलाया कि शायद वह शर्म और हया की वजह से नज़रें चुरा रहे हैं। 'वाह क्या होशियार हम भी हैं' कहकर वह अपने ही दिल के इस ख़ूबसूरत धोखे पर एक दर्दभरी, तल्ख़ मुस्कान बिखेर देता है।
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