हाथ हम से मिलाओ ऐ मूसा — दाग़ देहलवी
“Extend your hand in fellowship, O Moses; for we too are lovers of the Beloved's face.”
अर्थ
ऐ मूसा, हमसे हाथ मिलाओ क्योंकि महबूब के चेहरे के आशिक़ हम भी हैं।
विस्तार
इस शेर में शायर हज़रत मूसा को मुख़ातब करके बड़ी बेबाकी और मुहब्बत से उनकी ओर हाथ बढ़ाता है। मूसा अलैहिस्सलाम ने कोह-ए-तूर पर ख़ुदा के दीदार की तड़प दिखाई थी, और शायर कहता है कि हम दोनों का दर्द एक ही है—हम भी उसी महबूब-ए-हक़ीक़ी के चेहरे के तलबगार हैं। यह शेर एक पैग़म्बर की अज़मत और एक सच्चे आशिक़ के जज़्बे को एक ही धागे में पिरोकर दीदार की साझी प्यास को बयां करता है।
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