शहर ख़ाली किए दुकाँ कैसी — दाग़ देहलवी
“Why shutter the tavern just because the city is emptied? Even if only one, we too are a drinker here.”
अर्थ
शहर को वीरान समझकर दुकान (मयख़ाना) क्यों बंद कर रहे हो? चाहे अकेले ही सही, आख़िर एक शराब पीने वाले हम भी तो यहाँ मौजूद हैं।
विस्तार
यहाँ शायर मयकदे के मालिक से बड़ी सादगी से कहता है कि अगर सारा शहर वीरान हो भी गया, तो दुकान बंद करने की क्या जल्दी है—आख़िर एक प्यासा मैं तो अभी बचा हूँ! मयख़ाना यहाँ ज़िंदगी, इश्क़ और जज़्बात का प्रतीक है, जिसे दुनिया के मुँह मोड़ लेने पर भी बंद नहीं होना चाहिए। यह शेर अकेलेपन में भी इंसान के अटूट हौसले को दर्शाता है, कि महफ़िल को ज़िंदा रखने के लिए पूरी भीड़ नहीं, बल्कि बस एक सच्चा आशिक़ ही काफ़ी होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
