तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन — दाग़ देहलवी

तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन तुम भी हो बे-क़रार हम भी हैं

“You are restless, and restless am I; you too know no peace, and neither do I.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

तुम भी बेचैन हो और हम भी बेचैन हैं; तुम भी बेकरार हो और हम भी बेकरार हैं।

विस्तार

यह शेर मोहब्बत की उस खूबसूरत बराबरी को बयां करता है, जहाँ तड़प और बेचैनी दोनों तरफ़ बिल्कुल एक जैसी है। शायर बिना किसी दिखावे के साफ़ कहता है कि जुदाई या चाहत का यह दर्द किसी एक का नहीं, बल्कि दोनों का साझा है। इस बेक़रारी में भी एक अजीब सा सुकून छिपा है—यह जानकर कि जिस आग में हम जल रहे हैं, महबूब का दिल भी उसी आँच में पिघल रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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