आई मय-ख़ाने से ये किस की सदा — दाग़ देहलवी

आई मय-ख़ाने से ये किस की सदा लाओ यारों के यार हम भी हैं

“Whose voice is this that echoes from the tavern door? 'Bring the cup, friends, for we too are a friend of friends!'”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

मयख़ाने से यह किसकी आवाज़ आई है कि लाओ शराब पेश करो, हम भी तो दोस्तों के दोस्त हैं।

विस्तार

मय-ख़ाने की महफ़िल में अचानक गूंजती यह आवाज़ किसी ऐसे बेबाक और ज़िंदादिल इंसान की है जो दोस्तों की इस महफ़िल से बाहर नहीं रहना चाहता। यहाँ मय-ख़ाना महज़ शराब पीने की जगह नहीं, बल्कि सच्चे आशिक़ों और ज़िंदगी को खुलकर जीने वालों का एक मुक़द्दस ठिकाना है। यह पुकार किसी फ़ख़्र से नहीं, बल्कि बेपनाह अपनेपन से भरी है—जहाँ एक शख़्स पूरे हक़ से कहता है कि अगर तुम सब यारों के यार हो, तो इस दोस्ती और मुहब्बत के सिलसिले में हमारा भी बराबर का हिस्सा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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