दूर बैठा हुआ सर-ए-महफ़िल — दाग़ देहलवी
दूर बैठा हुआ सर-ए-महफ़िल
रंग-ए-सोहबत को देखता हूँ मैं
“Seated afar at the edge of the gathering, I watch the changing hues of companionship.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
मैं महफ़िल में सबसे दूर बैठा हुआ केवल इस संगति और सभा के रंग-ढंग को देख रहा हूँ।
विस्तार
इस शेर में एक ऐसी ख़ामोश उदासी है, जिसे हम सब कभी न कभी महसूस करते हैं—भीड़ के बीच होकर भी ख़ुद को बिल्कुल अकेला पाना। शायर महफ़िल में मौजूद तो है, लेकिन दिल से एक किनारे बैठकर लोगों के बदलते रंग, उनकी बातें और बनावट देख रहा है। यह शेर महफ़िल की रौनक और दिल की तन्हाई के बीच के फ़ासले को बेहद नज़ाकत से बयां करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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