ग़नीमत है चश्म-ए-तग़ाफ़ुल भी उन की — दाग़ देहलवी
“Even her glance of feigned neglect is a blessing to treasure; for those who look so rarely truly see beyond measure.”
अर्थ
उनकी बेरुख़ी या उपेक्षा भरी नज़र भी ग़नीमत (नेमत) है, क्योंकि जो लोग कम देखते हैं वे असल में बहुत कुछ देख लेते हैं।
विस्तार
यहाँ शायर महबूब की उस अदा की बात कर रहा है जहाँ वह अनजान बनने का दिखावा करता है। आशिक़ के लिए महबूब की यह बेरुखी भरी नज़र भी किसी नेमत से कम नहीं, क्योंकि जो लोग बहुत कम देखते हैं, उनकी एक सरसरी निगाह भी गहराइयों का समंदर समेटे होती है। यह शेर इस खूबसूरत अहसास को बयां करता है कि कभी-कभी किसी के नज़रअंदाज़ करने में भी बहुत गहरा ध्यान और प्यार छिपा रहता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
