बे-तलब जो मिला मिला मुझ को — दाग़ देहलवी
“Without my asking, whatever came, was granted to me; without a selfish motive, whatever was given, was given by Thee.”
अर्थ
मुझे जो कुछ भी मिला वह बिना मांगे ही मिला, और तूने जो कुछ भी दिया वह बिना किसी स्वार्थ या मतलब के दिया।
विस्तार
यह शे'र बेपनाह रहमत और निस्वार्थ प्रेम की बेहद खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। शायर शुक्रगुज़ारी के भाव में कहता है कि ज़िंदगी की सबसे अनमोल नेमतें उसे बिना माँगे ही हासिल हो गईं। वहीं देने वाले यानी ईश्वर या महबूब की अज़मत यह है कि उसने बदले में कुछ भी पाने की उम्मीद रखे बिना सब कुछ लुटा दिया। यह किसी लेन-देन से परे उस असीम अनुग्रह का एहसास है, जो दिल को सुकून और कृतज्ञता से भर देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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