क्या बताऊँ कि क्या लिया मैं ने — दाग़ देहलवी
“How can I tell what I have taken? How can I say what you have given?”
अर्थ
मैं कैसे बताऊँ कि मैंने क्या लिया या पाया है, और मैं शब्दों में कैसे कहूँ कि तुमने मुझे क्या दिया है।
विस्तार
यह शेर उस ख़ामोश और गहरे अहसास को छूता है जहाँ महबूब या ख़ुदा की दी हुई नेमतों के आगे अल्फ़ाज़ कम पड़ जाते हैं। आशिक़ यह समझ ही नहीं पा रहा कि उसे क्या कुछ मिल गया है—बेपनाह प्यार, हिज्र का मीठा दर्द या कोई रूहानी तसल्ली। यहाँ देने वाले की बेहिसाब रहमत और पाने वाले की कृतज्ञता दोनों ही इतनी असीम हैं कि ज़ुबान बस अचरज में ठहर कर रह जाती है।
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