है यही राह मंज़िल-ए-मक़्सूद — दाग़ देहलवी

है यही राह मंज़िल-ए-मक़्सूद ख़ूब रस्ते लगा दिया तू ने

“Is this then the path to my cherished goal? How splendidly you have sent me on my way!”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

क्या यही मेरी अभीष्ट मंज़िल का रास्ता है? तुमने मुझे ख़ूब सही रास्ते पर लगा दिया है।

विस्तार

इस शेर में एक बड़ा ही खूबसूरत और तीखा तंज़ छुपा है। शायर अपने महबूब या मुक़द्दर से शिकवा करते हुए कहता है कि क्या यही मेरी मंज़िल का रास्ता था, जहाँ तुमने मुझे ला खड़ा किया? 'रस्ते लगा देना' एक ऐसा मुहावरा है जिसमें ऊपरी तौर पर तो रहनुमाई का शुक्रिया झलकता है, मगर अंदर ही अंदर यह ताना है कि रास्ता दिखाने के बहाने तुमने मुझे बड़ी ख़ूबसूरती से भटका दिया और अपना पीछा छुड़ा लिया।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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