रहबर-ए-ख़िज़्र-ओ-हादी-ए-इल्यास — दाग़ देहलवी

रहबर-ए-ख़िज़्र-ओ-हादी-ए-इल्यास मुझ को वो रहनुमा दिया तू ने

“A guide to Khizr and a beacon to Ilyas—such was the mentor You bestowed on me.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

तूने मुझे ऐसा पथ-प्रदर्शक अता किया है जो ख़िज़्र और इल्यास का भी रहबर और हादी है।

विस्तार

इस्लामी रिवायतों में हज़रत ख़िज़्र और इल्यास को भटके हुए मुसाफ़िरों का ऐसा रहबर माना जाता है जो हमेशा रास्ता दिखाते हैं। शायर यहाँ परवरदिगार का शुक्र अदा करते हुए कहता है कि मुझे जो मुर्शिद या गुरु मिला है, उसकी शान इतनी बुलंद है कि वह ख़ुद इन अफ़सानवी रहनुमाओं को भी रास्ता दिखा सकता है। यह शे'र अपने उस्ताद या पीर के प्रति असीम अक़ीदत और गहरे एहतराम की बड़ी ख़ूबसूरत मिसाल है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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