तेरे ख़ंजर से भी तो ऐ क़ातिल — दाग़ देहलवी

तेरे ख़ंजर से भी तो ऐ क़ातिल नोक की नौ-जवान लेते हैं

“Even from your dagger, O slayer, the youth brave the pointed blade.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

ऐ क़ातिल! नौजवान तेरे ख़ंजर की नोक का भी सामना करते हैं और उससे डरते नहीं हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर नौजवानों के बेबाक और बेख़ौफ़ जज़्बे को बयां कर रहा है, जो महबूब के सितम से डरने के बजाय उसका डटकर सामना करते हैं। 'क़ातिल का ख़ंजर' यहाँ इश्क़ के इम्तिहान और दर्द का प्रतीक है, लेकिन आशिक़ अपनी धुन में इतने मगन हैं कि वो उस ख़तरे की धार से भी नज़रें मिलाने को तैयार हैं। यह महबूब की बेरुखी पर आशिक़ी के हौसले और बेपरवाह जवानी की ख़ूबसूरत जीत दिखाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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