अब भी गिर पड़ के ज़ोफ़ से नाले — दाग़ देहलवी

अब भी गिर पड़ के ज़ोफ़ से नाले सातवाँ आसमान लेते हैं

“Even now, stumbling from sheer frailty, my sighs still manage to reach and claim the seventh sky.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

अत्यधिक कमज़ोरी के कारण गिरते-पड़ते हुए भी मेरी आहें और फ़रियादें अब भी सातवें आसमान तक पहुँच जाती हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने गहरे दुख और उससे आई बेइंतहा कमज़ोरी का ज़िक्र कर रहा है। वह कहता है कि ग़म ने जिस्म को इतना लाचार कर दिया है कि उसकी आहें भी लड़खड़ाती हुई निकलती हैं, फिर भी उनके दर्द में इतना असर है कि वे गिरते-पड़ते सीधे सातवें आसमान तक पहुँच ही जाती हैं। यह बयां करता है कि भले ही इंसान जिस्मानी तौर पर टूट जाए, लेकिन दिल से निकली सच्ची चीख़ कभी बेअसर नहीं होती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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