अपने बिस्मिल का सर है ज़ानू पर — दाग़ देहलवी
“With the head of their slain lover resting upon their lap, with what tender affection do they take a life!”
अर्थ
अपने घायल आशिक़ का सिर महबूब की गोद में रखा है, और देखिए वे कितनी मोहब्बत से उसकी जान ले रहे हैं।
विस्तार
इस शेर में एक बेहद ख़ूबसूरत विरोधाभास है—महबूब अपने आशिक़ की जान भी ले रहा है, मगर उसका सिर प्यार से अपनी गोद में थामकर। उर्दू शायरी में माशूक़ के हाथों क़ुर्बान होना कोई ज़ुल्म नहीं, बल्कि इश्क़ का सबसे हसीन तोहफ़ा माना जाता है। यहाँ क़ातिल की अदा में इतनी नज़ाकत और अपनापन है कि आशिक़ के लिए यह मौत भी मोहब्बत का एक मीठा अहसास बन जाती है।
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