कौन जाता है उस गली में जिसे — दाग़ देहलवी
“Who would venture down that street, where even from afar the watchmen seize upon all who dare approach?”
अर्थ
उस गली में भला कौन जाता है जहाँ पहरेदार दूर से ही पकड़ लेते हैं।
विस्तार
इस शेर में महबूब की गली की सख़्ती और वहाँ पहुँचने की लाचारी का बड़ा दर्द भरा नक़्शा खींचा गया है। यहाँ 'पासबान' यानी पहरेदार सिर्फ़ दरबान नहीं हैं, बल्कि समाज की बंदिशें, लोक-लाज और ज़माने की वो सख्त निगाहें हैं जो आशिक़ को दूर से ही भांपकर रोक लेती हैं। शायर बड़ी सादगी से कहता है कि जिस राह पर क़दम बढ़ाते ही पहरेदार लपक पड़ते हों, वहाँ भला कोई बेबस प्रेमी जाने की हिम्मत कैसे जुटाए!
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