चाहिए पैग़ाम-बर दोनों तरफ़ — दाग़ देहलवी

चाहिए पैग़ाम-बर दोनों तरफ़ लुत्फ़ क्या जब दू-ब-दू होने लगी

“A messenger is needed on either side; where is the charm once lovers speak face to face?”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

दोनों तरफ़ संदेश ले जाने वाला संदेशवाहक होना चाहिए; अगर बात सीधे आमने-सामने होने लगे तो फिर उसमें क्या मज़ा रह जाता है।

विस्तार

उर्दू शायरी में प्यार का असली मज़ा उस दूरी और इंतज़ार में माना गया है, जो दो दिलों के बीच तड़प बनाए रखता है। शायर बड़ी नज़ाकत से कहता है कि जब तक बात संदेशवाहक यानी क़ासिद के ज़रिए होती है, तब तक हर लफ़्ज़ में एक ख़ास कशिश और बेचैनी रहती है। आमने-सामने आकर सब कुछ साफ़ कह देने से वह नाज़ुक सा सस्पेंस और मुहब्बत का सारा तिलिस्म ही टूट जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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