“You flatly deny any tryst with the rival—yet what if I should arrive and see it for myself?”
आप ग़ैर (प्रतिद्वंद्वी) से मिलने की बात से इनकार करते हैं, लेकिन अगर हमने आकर अपनी आँखों से देख लिया तो क्या होगा?
इस शेर में आशिक़ अपने महबूब से एक मीठी और शोख़ तकरार कर रहा है। महबूब इस बात से साफ़ मुकर रहा है कि उसकी रक़ीब (ग़ैर) से कोई मुलाक़ात हुई है, पर आशिक़ चुटकी लेते हुए पूछता है—अगर मैं अचानक वहाँ पहुँच गया और अपनी आँखों से सब देख लिया, तब क्या करोगे? इस सादे से सवाल के पीछे मुहब्बत की वो मासूम जलन और शक़ छुपा है, जो दिल को बेचैन भी करता है और तड़पाता भी।
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