उस ने सुब्ह-ए-शब-ए-विसाल मुझे जाते जाते भी आ के देख लिया

“At the dawn that followed the night of union, even as she departed, she came back to gaze upon me.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मिलन की रात के बाद की सुबह, वह जाते-जाते भी एक बार लौटकर मुझे देख गई।

विस्तार

यह शेर मिलन की रात के बाद जुदाई की सुबह का बेहद नाज़ुक और ख़ूबसूरत मंज़र पेश करता है। सुबह होते ही महबूब को रुख़सत तो होना था, मगर जाते-जाते भी वह ख़ुद को रोक न सका और मुड़कर एक आख़िरी नज़र देख गया। बिछड़ने की दहलीज़ पर डाली गई यह एक नज़र लफ़्ज़ों से ज़्यादा असर रखती है, जो बतलाती है कि अलग होने की बेबसी और चाहत सिर्फ़ आशिक़ के दिल में नहीं, महबूब के दिल में भी उतनी ही गहरी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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