“Finding the field entirely clear, I have beheld the beloved unveiled in the private chamber.”
रास्ता साफ़ पाकर और कोई रुकावट न देखकर, मैंने प्रियतम को उनके एकांत कक्ष में बिना पर्दे के देख लिया।
इस शेर में आशिक़ की एक प्यारी सी शरारत और उस गुप्त पल का रोमांच झलकता है जब कोई रुकावट नहीं थी। जब दुनिया का कोई पहरेदार या रोक-टोक मौजूद नहीं थी, तो शायर ने महबूब के ख़ल्वत यानी निजी कमरे में जाकर उन्हें बिना नक़ाब के देखने का मौक़ा हाथ से जाने नहीं दिया। यह शेर समाज की पाबंदियों से दूर, इश्क़ के एक बेबाक और दिलकश लम्हे को बड़ी सादगी से बयां करता है।
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