“Love was born into this world along with me, O counsellor; how then can we be parted—are twins ever torn apart?”
ऐ नसीहत देने वाले, इश्क़ हमारे साथ ही पैदा हुआ है, तो हम दोनों में जुदाई कैसे हो सकती है; क्या जुड़वाँ भी कभी अलग होते हैं?
यहाँ शायर नसीहत देने वाले नासेह से बड़ी नज़ाकत से कहता है कि इश्क़ कोई बाद में सीखी गई आदत नहीं, बल्कि यह तो उसकी पैदाइश के साथ ही वजूद में आया है। उसने अपने आप को और इश्क़ को 'तवाम' यानी जुड़वाँ बच्चों की तरह बताया है, जो एक ही वक़्त दुनिया में आए। जब कुदरत ने ही दोनों को एक साथ गढ़ा है, तो भला कोई इस रिश्ते को तोड़कर उन्हें कैसे जुदा कर सकता है!
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