“Why shield my robe, O healer, from the clutching hands of frenzy? Can collars such as mine ever rival the pure hem of Mary?”
ऐ चारागर, मैं दीवानेपन के हाथों से अपना लिबास क्यों बचाऊँ? क्या मेरे जैसे गरेबाँ भी कभी हज़रत मरयम के दामन की तरह पाक और पवित्र होते हैं?
शायर अपने हमदर्द या हकीम से कहता है कि वह दीवानगी के हाथों उसके दामन को तार-तार होने से क्यों बचा रहा है। उर्दू शायरी में गरेबाँ का चाक होना दीवाने आशिक़ की पहचान है, और यहाँ शायर तंज़िया लहजे में पूछता है कि क्या उसका चोला हज़रत मरियम के पाक दामन जैसा पवित्र है जिसकी हिफ़ाज़त की जाए। यह शेर इश्क़ के जुनून, बेपरवाही और इंसान के अपने ऐबों व कमज़ोरियों को बेबाक तरीक़े से क़ुबूल करने का ख़ूबसूरत इज़हार है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
