ये उठना बैठना महफ़िल में उन का रंग लाएगा क़यामत बन के उट्ठेंगे भबूका बन के बैठे हैं

“Their rising and sitting in this gathering will surely show its hue; they sit smoldering like a blazing ember, and will rise as the Day of Doom.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

महफ़िल में उनका यह आना-जाना और उठना-बैठना ज़रूर कोई बड़ा असर दिखाएगा। वे इस समय दहकते अंगारे की तरह बैठे हैं और जब उठेंगे तो क़यामत ढा देंगे।

विस्तार

शायर महफ़िल में महबूब की पुरकशिश और पुरतपिश मौजूदगी का बेहद ख़ूबसूरत मंज़र खींचते हैं। वे किसी दहकते हुए अंगारे की तरह सुर्ख़ और ख़ामोश बैठे हैं, गोया अंदर ही अंदर कोई तूफ़ान मचल रहा हो। उनका यह अंदाज़ साफ़ बता रहा है कि जब वे इस महफ़िल से उठेंगे, तो उनका जाना किसी क़यामत से कम नहीं होगा और हर तरफ़ दीवानों के दिलों में तहलका मच जाएगा।

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