“Behold this surge of weeping: whenever in separation I have cried, the very doors and walls of my tomb collapsed in a single moment.”
मेरे रोने की तीव्रता तो देखिए कि जब भी मैं जुदाई के दर्द में रोया हूँ, एक ही पल में मेरी क़ब्र के दरवाज़े और दीवारें ढह गए हैं।
यहाँ शायर ने जुदाई के दर्द और आँसुओं के तूफ़ान को बेहद असरदार अंदाज़ में बयां किया है। वे कहते हैं कि महबूब से बिछड़ने का ग़म मौत के बाद भी ख़त्म नहीं हुआ; जब मज़ार में उनकी आँखें छलकीं, तो आँसुओं के सैलाब ने एक ही पल में क़ब्र के दर-ओ-दीवार को ढहा दिया। यह शेर यह गहरा अहसास जगाता है कि सच्चा इश्क़ और उसका दर्द मौत की सरहदों में भी क़ैद नहीं रह सकता।
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