“Hearing a harsh word, the heart simply shatters; who could ever fathom the fragility of this mirror?”
दिल अगर कोई कठोर बात सुन ले तो वह टूट जाता है; इस आईने की नज़ाकत और कोमलता का अंदाज़ा भला किसे है।
इस शेर में शायर ने इंसान के दिल की तुलना एक नाज़ुक आईने से की है, जो बेहद साफ़ और संवेदनशील होता है। ज़ुबान से निकली एक कड़वी बात किसी पत्थर की तरह सीधे दिल पर लगती है और उसे चकनाचूर कर देती है। शायर बड़े सादे अंदाज़ में यह दर्द बयां कर रहा है कि लोग बिना सोचे-समझे कठोर बोल तो बोल देते हैं, पर दिल की नज़ाकत और उसकी ख़ामोश तकलीफ़ को समझने की ज़हमत कोई नहीं उठाता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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