क़दम क़दम पे तुम्हारे हमारे दिल की तरह बसी हुई है क़यामत किसी को क्या मालूम

“At your every step, just like this heart of mine, a day of doom resides—who could ever divine?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

किसे पता कि हमारे दिल की तरह तुम्हारे हर क़दम पर भी एक क़यामत बसी हुई है।

विस्तार

इस शे'र में शायर महबूब की मदहोश चाल और अपने तड़पते दिल के बीच एक अनोखा रिश्ता जोड़ता है। जैसे माशूक़ का हर क़दम अपने हुस्न से दुनिया में क़यामत यानी एक हलचल मचा देता है, ठीक वैसे ही आशिक़ के दिल के भीतर भी दर्द और बेचैनी की एक ख़ामोश क़यामत बसी हुई है। ज़माने को बाहर से सब पुरसुकून दिखता है, मगर इस छिपे हुए तूफ़ान और बेबसी को कोई दूसरा महसूस नहीं कर सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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