ब-ज़ाहिर उन को हया-दार लोग समझे हैं हया में जो है शरारत किसी को क्या मालूम

“Outwardly, people deem them modest and demure; yet what mischief lies veiled in that modesty, who can know for sure?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

दिखने में तो लोग उन्हें बहुत शर्मीला और हयादार समझते हैं, मगर उस हया के पीछे क्या शरारत छिपी है यह कोई नहीं जानता।

विस्तार

ज़माना महबूब की नीची निगाहों और ख़ामोशी को सिर्फ़ उनकी सादगी और शर्म-ओ-हया समझ बैठता है। लेकिन शायर यहाँ एक दिलकश राज़ खोलता है कि उस शर्मीलेपन की ओट में कितनी शोख़ी और शरारत छुपी है, यह सिर्फ़ चाहने वाला ही समझ सकता है। यह शेर हया के पर्दे में छिपे प्यार भरे नख़रे और दिल को छू लेने वाली चंचलता को बड़ी नज़ाकत से पेश करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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